स्पष्टता पहले, गति बाद में
पेज 9 • दिशा बनाम गति
अक्सर हम तेज़ चलने को सफलता समझ लेते हैं।
लेकिन यदि दिशा गलत हो, तो तेज़ी हमें और दूर ले जाती है।
दिशा यह तय करती है कि हम कहाँ पहुँचेंगे।
गति सिर्फ यह तय करती है कि हम कितनी जल्दी वहाँ पहुँचेंगे।
स्पष्टता हमें सही दिशा चुनने में मदद करती है।
जब दिशा सही होती है, तो धीमे कदम भी प्रगति कहलाते हैं।
ऐसे में हमें किसी की रफ्तार से ईर्ष्या नहीं होती।
हम अपने रास्ते से जुड़े रहते हैं।
यही जुड़ाव जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है।
आज की याद:
तेज़ होने से पहले,
सही दिशा चुनना ज़रूरी है।
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