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Wednesday, 28 January 2026

 

 विशेष विषय – नागरिक चेतना (Page 4)

विषय: नागरिक चेतना के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
दिनांक: 29 जनवरी 2026


🔹 भूमिका

नागरिक चेतना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा होती है।

परंतु आधुनिक समाज में अनेक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियाँ नागरिक चेतना को कमजोर कर रही हैं।

🔹 राजनीतिक उदासीनता

मतदान में कम भागीदारी, राजनीतिक प्रक्रियाओं से दूरी और “मेरे एक वोट से क्या होगा” जैसी मानसिकता लोकतंत्र को कमजोर बनाती है।

यह उदासीनता नागरिक कर्तव्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाती है।

🔹 नागरिक शिक्षा की कमी

अधिकारों की जानकारी तो अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन कर्तव्यों की समझ अब भी सीमित है।

नागरिक शिक्षा के अभाव में व्यक्ति जागरूक नागरिक की बजाय केवल लाभार्थी बनकर रह जाता है।

🔹 सामाजिक एवं आर्थिक असमानता

गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक भेदभाव नागरिक सहभागिता में बाधा उत्पन्न करते हैं।

जब जीवन की मूल आवश्यकताएँ ही पूरी न हों, तब नागरिक कर्तव्यों पर ध्यान देना कठिन हो जाता है।

🔹 गलत सूचना और डिजिटल भ्रम

सोशल मीडिया के प्रसार ने सूचना को सुलभ बनाया है, परंतु इसके साथ गलत सूचना और अफवाहें भी तेजी से फैलती हैं।

इससे समाज में अविश्वास, ध्रुवीकरण और असहिष्णुता बढ़ती है।

🔹 नैतिक मूल्यों का क्षरण

स्वार्थ, उपभोक्तावाद और तात्कालिक लाभ की प्रवृत्ति नागरिक जिम्मेदारी को पीछे धकेल देती है।

परिणामस्वरूप सार्वजनिक संपत्ति और नियमों के प्रति सम्मान कम होता जा रहा है।

🔹 निष्कर्ष

यदि इन चुनौतियों को समय रहते संबोधित नहीं किया गया, तो लोकतंत्र केवल एक औपचारिक व्यवस्था बनकर रह जाएगा।


परीक्षा उपयोगिता:
UPSC GS-II – Challenges to Democracy
UPSC GS-IV – Ethical Issues in Society
Essay • State PSC • Interview


Shaktimatha Today News
Awareness • Responsibility • Democracy

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