डेली करंट अफेयर्स – 22 फरवरी 2026
Hindi Edition – Page 3
अंतरराष्ट्रीय संबंध विश्लेषण
हिंद-प्रशांत क्षेत्र का रणनीतिक महत्व
हिंद-प्रशांत क्षेत्र 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति का केंद्र बन चुका है। यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक प्रतिस्पर्धा का मुख्य केंद्र है।
- समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता
- क्षेत्रीय शक्ति संतुलन
- रणनीतिक गठबंधन एवं क्वाड की भूमिका
GS Paper II दृष्टिकोण: भारत की विदेश नीति में हिंद-प्रशांत की भूमिका।
महत्व: इस क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक आर्थिक और सामरिक संतुलन को प्रभावित करती है।
💰 आर्थिक गहन विश्लेषण
विकास बनाम मुद्रास्फीति की चुनौती
नीति-निर्माताओं के सामने आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति नियंत्रण के बीच संतुलन स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है।
- मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचा
- रेपो दर और मौद्रिक उपकरण
- राजकोषीय एवं मौद्रिक समन्वय
GS Paper III दृष्टिकोण: आर्थिक स्थिरीकरण में मौद्रिक नीति की भूमिका।
विश्लेषणात्मक प्रश्न: उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण कितना प्रभावी है?
📊 प्रमुख रिपोर्ट एवं सूचकांक
- मानव विकास सूचकांक (HDI): जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और आय के आधार पर विकास का आकलन।
- वैश्विक भूख सूचकांक (GHI): भूख और कुपोषण की स्थिति का मापन।
- व्यवसाय सुगमता सूचकांक: नियामक ढांचे की दक्षता का मूल्यांकन।
परीक्षा टिप: प्रत्येक सूचकांक का प्रकाशन करने वाली संस्था और मापदंड याद रखें।
✍ मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास
प्रश्न:
हिंद-प्रशांत क्षेत्र का भारत की विदेश नीति में क्या महत्व है? विवेचना कीजिए।
संरचना सुझाव:
- परिचय – क्षेत्र की परिभाषा और महत्व
- मुख्य भाग – सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और कूटनीति
- निष्कर्ष – रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय सहयोग
🎯 त्वरित पुनरावृत्ति बिंदु
- हिंद-प्रशांत = सामरिक एवं आर्थिक महत्व
- मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण = 4% ± 2%
- HDI = संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)
- मौद्रिक एवं राजकोषीय नीति समन्वय आवश्यक
रणनीतिक सोच | विश्लेषणात्मक लेखन | परीक्षा में उत्कृष्टता
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