विशेष विषय
जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शासन
Page 5 – पर्यावरणीय कानून एवं संस्थाएँ
🇮🇳 भारत के प्रमुख पर्यावरणीय कानून
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 – व्यापक पर्यावरणीय संरक्षण कानून।
- वन संरक्षण अधिनियम, 1980 – वनों की सुरक्षा।
- जैव विविधता अधिनियम, 2002 – जैव संसाधनों का संरक्षण।
परीक्षा फोकस: अधिनियम का उद्देश्य और प्रमुख प्रावधान।
⚖ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)
- स्थापना – 2010।
- उद्देश्य – पर्यावरणीय विवादों का त्वरित निपटान।
- पर्यावरणीय न्याय और सतत विकास को बढ़ावा।
महत्व: पर्यावरणीय शासन में न्यायिक सक्रियता।
वैश्विक पर्यावरणीय संस्थाएँ
- UNEP (United Nations Environment Programme) – वैश्विक पर्यावरण नीति समन्वय।
- IPCC – जलवायु विज्ञान पर मूल्यांकन रिपोर्ट।
- Green Climate Fund (GCF) – जलवायु वित्त सहयोग।
परीक्षा टिप: प्रत्येक संस्था का मुख्यालय और भूमिका याद रखें।
पर्यावरणीय शासन की चुनौतियाँ
- कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन।
- विकास बनाम संरक्षण द्वंद्व।
- वैश्विक सहयोग की सीमाएँ।
विश्लेषण: मजबूत संस्थागत ढांचा सतत विकास का आधार है।
✍ मुख्य परीक्षा उत्तर संरचना
परिचय: पर्यावरणीय शासन का महत्व।
मुख्य भाग: भारतीय कानून + NGT + वैश्विक संस्थाएँ।
निष्कर्ष: प्रभावी क्रियान्वयन और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता।
“कानून और संस्थाएँ तभी प्रभावी हैं जब उनका ईमानदारी से क्रियान्वयन हो।”
Prepared by Shaktimatha Learning
संस्थागत विश्लेषण | नीति समझ | परीक्षा उत्कृष्टता
संस्थागत विश्लेषण | नीति समझ | परीक्षा उत्कृष्टता
No comments:
Post a Comment