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GS Paper 3 | भारतीय अर्थव्यवस्था | संरचनात्मक सुधार
विकास दर और आर्थिक प्रवृत्तियाँ
भारतीय अर्थव्यवस्था में स्थिर विकास दर और घरेलू मांग में वृद्धि सकारात्मक संकेत दे रही है।
सार्वजनिक पूंजीगत व्यय आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान कर रहा है।
निवेश और पूंजी निर्माण
अवसंरचना विकास, विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था में निवेश वृद्धि दीर्घकालिक उत्पादक क्षमता को मजबूत करती है।
निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की संयुक्त भागीदारी आर्थिक स्थिरता का आधार है।
मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति
मुद्रास्फीति नियंत्रण आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
मौद्रिक नीति संतुलित मांग और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राजकोषीय नीति और व्यय प्रबंधन
राजकोषीय अनुशासन और लक्षित व्यय दीर्घकालिक आर्थिक विश्वसनीयता को बढ़ाते हैं।
पूंजीगत व्यय आर्थिक गुणक प्रभाव उत्पन्न करता है।
प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
पूंजीगत व्यय का मुख्य लाभ क्या है?
A. अल्पकालिक उपभोग वृद्धि
B. स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण
C. आयात पर निर्भरता
D. राजकोषीय घाटे में वृद्धि
उत्तर: B
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
“सार्वजनिक पूंजीगत व्यय भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक विकास रणनीति का प्रमुख स्तंभ है।” चर्चा कीजिए।
सुदृढ़ अर्थव्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र का आधार है।
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