विशेष विषय – भारतीय मानसून
पेज 5 | जलवायु-लचीली कृषि : आगे की राह
परिप्रेक्ष्य:
El Niño, अनियमित मानसून और जलवायु परिवर्तन ने
भारतीय कृषि को अधिक जोखिम-संवेदनशील बना दिया है।
इस संदर्भ में जलवायु-लचीली कृषि (Climate Resilient Agriculture)
कृषि-सततता और किसान सुरक्षा का प्रमुख समाधान है।
1️⃣ कृषि-स्तर पर रणनीतियाँ
- कम जल-आवश्यकता वाली और अल्प-अवधि फसलें
- फसल विविधीकरण और अंतर-फसल प्रणाली
- सूखा-रोधी एवं ताप-सहिष्णु बीजों का उपयोग
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खेती
2️⃣ जल प्रबंधन सुधार
- सूक्ष्म सिंचाई – ड्रिप और स्प्रिंकलर
- वर्षा-जल संचयन और जलागम विकास
- भूजल के सतत उपयोग के लिए नियमन
- फसल-जल कैलेंडर का पालन
3️⃣ संस्थागत और नीतिगत उपाय
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सुदृढ़ीकरण
- जलवायु-स्मार्ट कृषि मिशन का विस्तार
- कृषि विस्तार सेवाओं में तकनीक का उपयोग
- स्थानीय स्तर पर मौसम पूर्वानुमान सेवाएँ
4️⃣ प्रौद्योगिकी और नवाचार
- सैटेलाइट और AI-आधारित मौसम पूर्वानुमान
- डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म और मोबाइल अलर्ट
- किसान-उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्रोत्साहन
5️⃣ सामाजिक और आर्थिक आयाम
- किसानों की आय विविधीकरण (पशुपालन, मत्स्य)
- ग्रामीण गैर-कृषि रोजगार के अवसर
- महिला किसानों और छोटे किसानों पर विशेष ध्यान
🎯 समग्र निष्कर्ष:
जलवायु परिवर्तन के युग में
भारतीय मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए
जलवायु-लचीली कृषि ही
कृषि सुरक्षा, खाद्य स्थिरता और किसान कल्याण
का दीर्घकालिक समाधान है।
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