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Tuesday, 10 February 2026

 

 विशेष विषय – भारतीय मानसून
पेज 5 | जलवायु-लचीली कृषि : आगे की राह

परिप्रेक्ष्य:
El Niño, अनियमित मानसून और जलवायु परिवर्तन ने भारतीय कृषि को अधिक जोखिम-संवेदनशील बना दिया है। इस संदर्भ में जलवायु-लचीली कृषि (Climate Resilient Agriculture) कृषि-सततता और किसान सुरक्षा का प्रमुख समाधान है।

1️⃣ कृषि-स्तर पर रणनीतियाँ

  • कम जल-आवश्यकता वाली और अल्प-अवधि फसलें
  • फसल विविधीकरण और अंतर-फसल प्रणाली
  • सूखा-रोधी एवं ताप-सहिष्णु बीजों का उपयोग
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खेती

2️⃣ जल प्रबंधन सुधार

  • सूक्ष्म सिंचाई – ड्रिप और स्प्रिंकलर
  • वर्षा-जल संचयन और जलागम विकास
  • भूजल के सतत उपयोग के लिए नियमन
  • फसल-जल कैलेंडर का पालन

3️⃣ संस्थागत और नीतिगत उपाय

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सुदृढ़ीकरण
  • जलवायु-स्मार्ट कृषि मिशन का विस्तार
  • कृषि विस्तार सेवाओं में तकनीक का उपयोग
  • स्थानीय स्तर पर मौसम पूर्वानुमान सेवाएँ

4️⃣ प्रौद्योगिकी और नवाचार

  • सैटेलाइट और AI-आधारित मौसम पूर्वानुमान
  • डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म और मोबाइल अलर्ट
  • किसान-उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्रोत्साहन

5️⃣ सामाजिक और आर्थिक आयाम

  • किसानों की आय विविधीकरण (पशुपालन, मत्स्य)
  • ग्रामीण गैर-कृषि रोजगार के अवसर
  • महिला किसानों और छोटे किसानों पर विशेष ध्यान

🎯 समग्र निष्कर्ष:
जलवायु परिवर्तन के युग में भारतीय मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए जलवायु-लचीली कृषि ही कृषि सुरक्षा, खाद्य स्थिरता और किसान कल्याण का दीर्घकालिक समाधान है।

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