डेली करंट अफेयर्स – 1 मार्च 2026
हिंदी | पेज 11 | भारतीय संविधान एवं राजनीति
GS Paper 2 | लोकतांत्रिक शासन | संवैधानिक ढांचा
शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत
भारतीय संविधान विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन स्थापित करता है।
नियंत्रण और संतुलन (Checks and Balances) लोकतांत्रिक स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।
संसदीय जवाबदेही
संसद नीति निर्माण और कार्यपालिका की जवाबदेही का प्रमुख मंच है।
प्रश्नकाल और संसदीय समितियाँ पारदर्शिता को मजबूत करती हैं।
संघवाद और सहकारी संघवाद
भारत का संघीय ढांचा केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करता है।
सहकारी संघवाद नीति क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाता है।
संवैधानिक नैतिकता
संवैधानिक नैतिकता केवल विधिक प्रावधानों का पालन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता है।
न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता संवैधानिक मूल आधार हैं।
प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
शक्ति पृथक्करण का उद्देश्य क्या है?
A. कार्यपालिका की सर्वोच्चता
B. संस्थागत संतुलन और जवाबदेही
C. केवल न्यायपालिका की शक्ति बढ़ाना
D. केंद्र की पूर्ण शक्ति
उत्तर: B
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
“संवैधानिक नैतिकता भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है।” विश्लेषण कीजिए।
मजबूत संस्थाएँ ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान हैं।
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