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Saturday, 28 February 2026

 

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हिंदी | पेज 8 | बजट एवं राजकोषीय नीति

GS Paper 3 | सार्वजनिक वित्त | आर्थिक स्थिरता


राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)

राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और कुल आय (उधार को छोड़कर) के बीच का अंतर है।

नियंत्रित राजकोषीय घाटा निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करता है।

पूंजीगत व्यय बनाम राजस्व व्यय

पूंजीगत व्यय से स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होता है, जैसे अवसंरचना और औद्योगिक परियोजनाएँ।

राजस्व व्यय प्रशासनिक और सामाजिक सेवाओं से संबंधित होता है।

ऋण प्रबंधन

सार्वजनिक ऋण का सतत प्रबंधन दीर्घकालिक आर्थिक विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।

उत्पादक निवेश के माध्यम से ऋण का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।

कर संरचना और संसाधन जुटाव

कर आधार का विस्तार और पारदर्शी कर प्रशासन राजस्व संग्रह को सुदृढ़ करते हैं।

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के बीच संतुलन आवश्यक है।

राजकोषीय अनुशासन और विकास

विकासोन्मुख व्यय और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन आवश्यक है।

अल्पकालिक प्रोत्साहन के बजाय दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

पूंजीगत व्यय का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A. उपभोग व्यय में वृद्धि
B. स्थायी परिसंपत्ति निर्माण
C. राजकोषीय घाटा बढ़ाना
D. कर दरों में कमी

उत्तर: B


मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

“राजकोषीय अनुशासन और विकासोन्मुख व्यय के बीच संतुलन आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।” विश्लेषण कीजिए।


सुदृढ़ सार्वजनिक वित्त ही दीर्घकालिक विकास का आधार है।
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