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Monday, 9 February 2026

 

प्रौद्योगिकी बनाम आम नागरिक – हिंदी
Page 4 | डिजिटल डिवाइड और असमानता

मुख्य समस्या: डिजिटल प्रौद्योगिकी के विस्तार ने नई संभावनाएँ खोली हैं, लेकिन असमान पहुँच ने डिजिटल डिवाइड को गहरा किया है। यह असमानता आम नागरिक के अधिकारों, अवसरों और सेवाओं तक पहुँच को सीधे प्रभावित करती है।

डिजिटल डिवाइड का अर्थ केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी नहीं है। यह उपकरणों की उपलब्धता, डिजिटल साक्षरता, भाषाई बाधाओं और संस्थागत क्षमताओं से भी जुड़ा है। जब शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन होती हैं, तो जिनके पास डिजिटल संसाधन नहीं होते, वे पीछे छूट जाते हैं।

डिजिटल डिवाइड के आयाम

  • भौगोलिक: ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में कमजोर कनेक्टिविटी
  • आर्थिक: स्मार्टफोन, डेटा और उपकरणों की लागत
  • सामाजिक: लिंग, आयु, दिव्यांगता और साक्षरता अंतर
  • संस्थागत: स्थानीय स्तर पर डिजिटल क्षमता की कमी

आम नागरिक पर प्रभाव

  • कल्याणकारी योजनाओं से बहिष्करण
  • ऑनलाइन शिक्षा से सीखने की खाई
  • डिजिटल रोजगार और बाजारों तक सीमित पहुँच
  • मध्यस्थों पर निर्भरता और अतिरिक्त लागत

 शहरी–ग्रामीण और सामाजिक असमानता

  • शहरों में बेहतर डिजिटल अवसंरचना
  • महिलाओं और बुजुर्गों की कम डिजिटल भागीदारी
  • प्रवासी श्रमिकों की डिजिटल पहचान समस्याएँ

 डिजिटल डिवाइड को कम करने के उपाय

  • सस्ती और विश्वसनीय ब्रॉडबैंड/मोबाइल कनेक्टिविटी
  • सार्वजनिक डिजिटल केंद्र और सामुदायिक सुविधा
  • स्थानीय भाषाओं में सेवाएँ और कंटेंट
  • स्कूलों और समुदायों में डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम
  • ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन विकल्पों का प्रावधान

 परीक्षा दृष्टिकोण

यह विषय GS-I (समाज), GS-II (शासन) और GS-III (प्रौद्योगिकी व समावेशी विकास) के लिए महत्वपूर्ण है। उत्तर में डिजिटल डिवाइड–असमानता–समावेशन की स्पष्ट कड़ी दिखनी चाहिए।

 सारांश: तकनीक तभी समान अवसर देती है जब पहुँच, साक्षरता और भाषा सबके लिए सुलभ हों। डिजिटल समावेशन, सामाजिक समावेशन की कुंजी है।

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