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Monday, 2 February 2026

 

 Financial Federalism in India – Page 2
वित्तीय संघवाद : गहन विश्लेषण

भारत में वित्तीय संघवाद केवल संवैधानिक प्रावधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक नीतियों, बजटीय निर्णयों और केंद्र–राज्य संबंधों की वास्तविक कार्यप्रणाली से भी जुड़ा हुआ है।


🔹 ऊर्ध्वाधर वित्तीय असंतुलन (Vertical Fiscal Imbalance)

ऊर्ध्वाधर असंतुलन तब उत्पन्न होता है जब:

  • केंद्र के पास अधिक कर-संग्रह शक्तियाँ होती हैं
  • राज्यों पर अधिक व्यय दायित्व होते हैं

उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास मुख्यतः राज्य विषय हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में पर्याप्त संसाधन राज्यों के पास नहीं होते।

इसी असंतुलन को दूर करने के लिए वित्त आयोग की व्यवस्था की गई है।


🔹 क्षैतिज वित्तीय असंतुलन (Horizontal Fiscal Imbalance)

क्षैतिज असंतुलन राज्यों के बीच आर्थिक असमानता को दर्शाता है।

  • कुछ राज्य औद्योगिक रूप से विकसित
  • कुछ राज्य कृषि या संसाधन-आधारित
  • प्रति व्यक्ति आय में भारी अंतर

वित्त आयोग जनसंख्या, आय दूरी, क्षेत्रफल और सामाजिक संकेतकों के आधार पर राज्यों को अनुदान देकर इस असंतुलन को कम करने का प्रयास करता है।


🔹 केंद्र प्रायोजित योजनाएँ (CSS) और संघवाद

केंद्र प्रायोजित योजनाएँ वित्तीय संघवाद का एक विवादास्पद पहलू हैं।

  • केंद्र द्वारा डिजाइन की गई योजनाएँ
  • राज्यों द्वारा कार्यान्वयन
  • आंशिक वित्तीय योगदान राज्यों का

राज्यों का तर्क है कि अत्यधिक CSS से राज्य की नीति-स्वायत्तता कम होती है।


🔹 ऋण और उधारी की समस्या

अनुच्छेद 293 के अंतर्गत राज्य ऋण ले सकते हैं, लेकिन केंद्र की अनुमति आवश्यक होती है।

वर्तमान में कई राज्य:

  • उच्च राजकोषीय घाटे
  • बढ़ते सार्वजनिक ऋण
  • ब्याज भुगतान के दबाव

का सामना कर रहे हैं, जो वित्तीय संघवाद को कमजोर करता है।


🔹 GST परिषद और सहकारी संघवाद

GST परिषद को सहकारी संघवाद का प्रतीक माना गया।

  • केंद्र और सभी राज्य सदस्य
  • सर्वसम्मति से निर्णय का प्रयास
  • एक राष्ट्र – एक कर की अवधारणा

हालाँकि, GST मुआवज़ा समाप्ति और राजस्व अनिश्चितता ने कई राज्यों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं।


🔹 समकालीन मुद्दे (Current Issues)

  • वित्त आयोग बनाम नीति आयोग की भूमिका
  • करों में उपकर और अधिभार का बढ़ता उपयोग
  • राज्यों की घटती कर हिस्सेदारी
  • राज्यों की वित्तीय स्वतंत्रता पर बहस

ये मुद्दे दिखाते हैं कि वित्तीय संघवाद एक गतिशील और विकसित होती प्रक्रिया है।


 निष्कर्ष (Page 2)

वित्तीय संघवाद की सफलता केवल संवैधानिक प्रावधानों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, आपसी विश्वास और सहयोग पर निर्भर करती है।

सहयोग + संतुलन + पारदर्शिता → मजबूत संघवाद 🇮🇳

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