विशेष विषय – भारतीय राजनीति
स्पीकर बनाम दलबदल विरोधी कानून
Page 1: पृष्ठभूमि, उद्देश्य एवं संवैधानिक आधार
🔹 1. विषय का महत्व
भारत में राजनीतिक अस्थिरता, सरकार गिराने की प्रवृत्ति और विधायकों की खरीद-फरोख्त ने दलबदल विरोधी कानून को एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक विषय बना दिया है। यह विषय UPSC GS-II, State PSC और निबंध के लिए अत्यंत उपयोगी है।
🔹 2. दलबदल क्या है?
जब कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अपनी पार्टी छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल हो जाता है या पार्टी के निर्देशों के विरुद्ध मतदान करता है, तो उसे दलबदल कहा जाता है।
🔹 3. दलबदल विरोधी कानून का उद्भव
1967 के बाद बार-बार सरकारें गिरने, “आया राम – गया राम” जैसी घटनाओं के कारण संविधान में 52वाँ संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा 10वीं अनुसूची जोड़ी गई।
🔹 4. कानून के प्रमुख उद्देश्य
- राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना
- जनादेश की रक्षा करना
- अनैतिक राजनीतिक सौदेबाज़ी रोकना
- दलीय अनुशासन मजबूत करना
🔹 5. स्पीकर की भूमिका
दलबदल से जुड़े मामलों में स्पीकर (अध्यक्ष) को निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। यही बिंदु आगे चलकर सबसे अधिक विवाद का कारण बनता है।
🔹 6. संवैधानिक आधार
- 10वीं अनुसूची – दलबदल से अयोग्यता
- अनुच्छेद 102(2) – संसद सदस्य
- अनुच्छेद 191(2) – विधानसभा सदस्य
इस विषय को संवैधानिक नैतिकता, स्पीकर की निष्पक्षता और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से जोड़कर लिखें।
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