शहरीकरण – पेज 5 | सतत एवं समावेशी विकास
विषय: सतत एवं समावेशी शहरीकरण
सतत एवं समावेशी शहरीकरण का उद्देश्य आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समानता के बीच संतुलन स्थापित करना है। तेज़ी से बढ़ती शहरी जनसंख्या के संदर्भ में यह आवश्यक है कि शहरी विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचें।
🔹 सतत शहरीकरण की विशेषताएँ
- सुनियोजित शहरी विस्तार और भूमि का कुशल उपयोग
- पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढाँचा
- विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था
- जल, ऊर्जा और संसाधनों का दक्ष उपयोग
🔹 समावेशी शहरीकरण की आवश्यकता
- कम आय वर्गों के लिए किफायती आवास
- झुग्गी-झोपड़ी पुनर्विकास एवं पुनर्वास
- पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच
- शहरी योजना में नागरिकों की भागीदारी
🔹 परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व
यह विषय भारतीय समाज, सतत विकास, शहरी नियोजन और शासन से संबंधित है। UPSC, State PSC और Group परीक्षाओं में सतत शहरों और समावेशी शहरी विकास पर नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं।
🔹 आगे का मार्ग (Way Forward)
- शहरी स्थानीय निकायों का सशक्तिकरण
- जन-केंद्रित स्मार्ट सिटी मॉडल
- ग्रामीण–शहरी संतुलित विकास
- दीर्घकालिक और पर्यावरण-संवेदनशील योजना
सारांश: सतत और समावेशी शहरीकरण ही शहरों को रहने योग्य, लचीला और आम आदमी के लिए उपयोगी बना सकता है।
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