शहरीकरण – हिंदी
Page 3 | शहरी शासन और स्थानीय निकाय
मुख्य विषय: शहरी शासन (Urban Governance) शहरों के प्रभावी संचालन, सेवा वितरण और नागरिक भागीदारी की आधारशिला है। स्थानीय शहरी निकाय (ULBs) आम नागरिक और सरकार के बीच सबसे निकटतम प्रशासनिक इकाई होते हैं।
भारत में शहरी शासन को 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम संवैधानिक आधार प्रदान करता है। नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत शहरी सेवाओं, नियोजन और स्थानीय विकास के लिए उत्तरदायी हैं। हालाँकि, वित्तीय कमजोरी, क्षमता की कमी और राज्य सरकारों पर निर्भरता इनकी प्रभावशीलता को सीमित करती है।
शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका
- जल आपूर्ति, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन
- स्थानीय सड़कें और स्ट्रीट लाइटिंग
- शहरी नियोजन और भूमि उपयोग
- सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्राथमिक शिक्षा
शहरी शासन की प्रमुख चुनौतियाँ
- वित्तीय संसाधनों की कमी
- कमजोर कर संग्रह और शुल्क प्रणाली
- प्रशासनिक एवं तकनीकी क्षमता का अभाव
- राजनीतिक हस्तक्षेप और जवाबदेही की कमी
नागरिक सहभागिता और जवाबदेही
- वार्ड समितियाँ और क्षेत्र सभाएँ
- सामाजिक लेखा परीक्षा और RTI
- डिजिटल शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म
- स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता
शहरी शासन सुधार के उपाय
- वित्तीय स्वायत्तता और राजस्व सुधार
- पेशेवर शहरी कैडर और प्रशिक्षण
- ई-गवर्नेंस और डेटा आधारित निर्णय
- राज्य–स्थानीय समन्वय को मजबूत करना
परीक्षा दृष्टिकोण
यह विषय GS-II (संविधान, शासन) और निबंध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तर में संवैधानिक प्रावधान + व्यावहारिक चुनौतियाँ + सुधार की स्पष्ट संरचना अपेक्षित है।
सारांश: मजबूत शहरी शासन के बिना सतत और समावेशी शहरीकरण संभव नहीं। स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने की कुंजी है।
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