दैनिक समसामयिकी – 28 फरवरी 2026
हिंदी | पृष्ठ 5 – भाग III | उन्नत विश्लेषणात्मक अर्थव्यवस्था
1. निवेश-आधारित विकास बनाम उपभोग-आधारित विकास
भारत धीरे-धीरे उपभोग-आधारित विकास मॉडल से निवेश-आधारित विकास मॉडल की ओर अग्रसर हो रहा है।
विश्लेषणात्मक बिंदु:
- सार्वजनिक पूंजी निवेश से निजी निवेश को प्रोत्साहन (Crowding-in Effect)
- अवसंरचना से उत्पादकता में वृद्धि
- दीर्घकालिक संरचनात्मक परिवर्तन
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण: क्या सतत सार्वजनिक निवेश निजी क्षेत्र के विश्वास को मजबूत कर सकता है?
2. तकनीक-सक्षम शासन और आर्थिक दक्षता
डिजिटल शासन सुधारों ने प्रशासनिक लागत को कम किया है और संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित किया है।
प्रभाव:
- पारदर्शिता में वृद्धि
- लक्षित लाभ वितरण
- राजकोषीय प्रबंधन में सुधार
GS Paper 2 + GS Paper 3 समन्वय: शासन सुधार और आर्थिक वृद्धि का संबंध।
📊 3. मुद्रास्फीति-विकास संतुलन (Inflation-Growth Trade-off)
नीति-निर्माताओं को मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना होता है।
नीतिगत समन्वय:
- मौद्रिक सख्ती बनाम विकास समर्थन
- FRBM अधिनियम के तहत राजकोषीय अनुशासन
- आपूर्ति-पक्ष सुधार
विश्लेषण: समन्वित नीति दृष्टिकोण ही स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है।
4. डिजिटल अर्थव्यवस्था – भारत की सॉफ्ट पावर
भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल वैश्विक स्तर पर प्रशंसित हो रहा है।
रणनीतिक आयाम:
- डिजिटल कूटनीति
- प्रौद्योगिकी साझेदारी
- वैश्विक डिजिटल मानकों का निर्धारण
उत्तर लेखन ढांचा (Model Framework)
प्रश्न: “भारत की संरचनात्मक आर्थिक परिवर्तन में पूंजीगत व्यय और डिजिटल सुधारों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।”
- भूमिका: आर्थिक पुनरुद्धार का संदर्भ
- मुख्य भाग: निवेश प्रभाव + डिजिटल दक्षता
- चुनौतियाँ: राजकोषीय दबाव, डिजिटल विभाजन
- निष्कर्ष: सतत और समावेशी विकास की दिशा
📘 विश्लेषणात्मक सोच + संरचित उत्तर = उच्च रैंक
© 2026 Shaktimatha Learning – उन्नत अर्थव्यवस्था श्रृंखला
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