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Friday, 27 February 2026

 

 दैनिक समसामयिकी – 28 फरवरी 2026

हिंदी | पृष्ठ 5 – भाग II | अर्थव्यवस्था – विस्तृत विश्लेषण


💰 1. पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) क्या है?

पूंजीगत व्यय वह व्यय है जिसके माध्यम से सरकार स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करती है, जैसे सड़क, रेलवे, बंदरगाह, डिजिटल अवसंरचना आदि।

महत्व:

  • दीर्घकालिक आर्थिक लाभ
  • रोजगार सृजन
  • उत्पादकता में वृद्धि
  • निजी निवेश को प्रोत्साहन

मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण: सतत विकास और राजकोषीय स्थिरता के संदर्भ में पूंजीगत व्यय की भूमिका।


 2. वित्तीय समावेशन – संरचनात्मक सुधार

वित्तीय समावेशन का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को बैंकिंग, बीमा और ऋण जैसी सेवाएँ उपलब्ध कराना है।

मुख्य साधन:

  • प्रधानमंत्री जनधन योजना
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)
  • डिजिटल भुगतान प्रणाली

इससे सामाजिक समानता और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलता है।


📊 3. मुद्रास्फीति – अवधारणा और नियंत्रण

मुद्रास्फीति वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में निरंतर वृद्धि को दर्शाती है।

प्रकार:

  • मांग-संचालित मुद्रास्फीति (Demand-pull)
  • लागत-संचालित मुद्रास्फीति (Cost-push)

नियंत्रण उपाय:

  • रेपो दर में वृद्धि
  • राजकोषीय अनुशासन
  • आपूर्ति पक्ष सुधार

Prelims Tip: CPI और WPI में अंतर जानें।


 4. डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान और डेटा विनिमय प्रणाली शामिल हैं।

प्रभाव:

  • भ्रष्टाचार में कमी
  • सेवा वितरण में दक्षता
  • सरकारी योजनाओं की सटीक लक्ष्य निर्धारण

मुख्य परीक्षा संबंध: विकासशील देशों के लिए एक मॉडल के रूप में भारत की भूमिका।


 अभ्यास प्रश्न

1. पूंजीगत व्यय आर्थिक वृद्धि को कैसे प्रोत्साहित करता है? (250 शब्द)

2. डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना वित्तीय समावेशन को किस प्रकार सुदृढ़ करती है? (250 शब्द)


📘 गहन समझ + संरचित लेखन = उत्कृष्ट अंक
© 2026 Shaktimatha Learning – अर्थव्यवस्था विश्लेषण श्रृंखला

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