🌊 विशेष विषय – भारतीय मानसून
पेज 2 | El Niño, La Niña एवं ENSO की अवधारणा
भूमिका:
भारतीय मानसून केवल स्थानीय कारकों से नियंत्रित नहीं होता,
बल्कि वैश्विक महासागरीय–वायुमंडलीय घटनाएँ भी इसे प्रभावित करती हैं।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण है ENSO (El Niño–Southern Oscillation),
जिसका सीधा प्रभाव भारतीय वर्षा पैटर्न पर पड़ता है।
1️⃣ ENSO क्या है?
ENSO एक आवर्ती जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्र सतह तापमान (SST) और वायुदाब पैटर्न में परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है। ENSO के तीन चरण होते हैं – El Niño, La Niña और Neutral अवस्था।
2️⃣ El Niño (एल नीनो)
El Niño की अवस्था में पूर्वी प्रशांत महासागर का समुद्र सतह तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। इसके कारण व्यापारिक पवनें कमजोर पड़ती हैं और वॉकर परिसंचरण प्रभावित होता है।
- प्रशांत महासागर में असामान्य ऊष्मा
- व्यापारिक पवनों का कमजोर होना
- भारतीय मानसून पर नकारात्मक प्रभाव की संभावना
3️⃣ La Niña (ला नीना)
La Niña की अवस्था El Niño के विपरीत होती है। इसमें पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से कम हो जाता है, जिससे व्यापारिक पवनें मजबूत होती हैं।
- समुद्र सतह तापमान में गिरावट
- व्यापारिक पवनों का सशक्त होना
- भारतीय मानसून के मजबूत होने की संभावना
4️⃣ वॉकर परिसंचरण (Walker Circulation)
वॉकर परिसंचरण प्रशांत महासागर के ऊपर पूर्व–पश्चिम दिशा में वायु परिसंचरण को दर्शाता है। El Niño और La Niña के दौरान इस परिसंचरण में बदलाव वैश्विक वर्षा पैटर्न को प्रभावित करता है।
5️⃣ ENSO और भारतीय मानसून का संबंध
- El Niño वर्ष – कमजोर या अनियमित मानसून की संभावना
- La Niña वर्ष – सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना
- हालाँकि यह संबंध पूर्णतः निश्चित नहीं होता
🎯 निष्कर्ष:
ENSO एक वैश्विक जलवायु चालक है,
जिसकी निगरानी भारतीय मानसून पूर्वानुमान
और कृषि नीति नियोजन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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