🌧️ विशेष विषय – भारतीय मानसून
पेज 3 | El Niño का भारतीय मानसून पर प्रभाव
परिचय:
El Niño एक वैश्विक जलवायु घटना है,
जो प्रशांत महासागर में तापमान और वायुदाब परिवर्तनों के माध्यम से
भारतीय मानसून को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है।
ऐतिहासिक रूप से कई El Niño वर्षों में
भारत में कम वर्षा और मानसून अस्थिरता देखी गई है।
1️⃣ मानसून प्रवाह पर प्रभाव
El Niño के दौरान व्यापारिक पवनें कमजोर हो जाती हैं, जिससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी का परिवहन कम हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप दक्षिण-पश्चिम मानसून की तीव्रता घट सकती है।
2️⃣ वर्षा वितरण में असमानता
El Niño वर्षों में वर्षा का स्थानिक और कालिक वितरण अत्यधिक असमान हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में सूखा तो कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा देखी जा सकती है।
3️⃣ मानसून ब्रेक्स में वृद्धि
El Niño मानसून के दौरान ब्रेक पीरियड्स की आवृत्ति बढ़ा सकता है, जिससे फसलों के लिए जल उपलब्धता बाधित होती है।
4️⃣ मानसून आगमन और वापसी
El Niño वर्षों में मानसून का आगमन विलंबित और वापसी शीघ्र हो सकती है, जिससे कुल वर्षा अवधि घट जाती है।
5️⃣ ऐतिहासिक उदाहरण
- 2002 और 2009 – गंभीर सूखा वर्ष
- 2015 – कमजोर मानसून और कृषि संकट
- सभी El Niño वर्ष समान प्रभाव नहीं डालते
🎯 विश्लेषणात्मक निष्कर्ष:
El Niño और भारतीय मानसून के बीच
एक मजबूत लेकिन पूर्णतः नियत नहीं संबंध है।
अन्य कारक जैसे IOD और स्थानीय वायुमंडलीय दशाएँ
भी मानसून की दिशा तय करती हैं।
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