राज्यपाल बनाम राज्य विधानसभा
Page 2: शक्तियाँ, विवेकाधीन अधिकार एवं वास्तविक टकराव
UPSC GS-II • State PSC • Constitutional Focus
🔹 1. राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियाँ
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। उसकी शक्तियाँ मुख्यतः औपचारिक हैं और मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयोग की जाती हैं।
- विधानसभा सत्र बुलाना, स्थगित करना और भंग करना
- विधेयकों पर सहमति देना, लौटाना या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना
- मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों की नियुक्ति
- अध्यादेश जारी करना (अनुच्छेद 213)
🔹 2. विवेकाधीन अधिकार (Discretionary Powers)
कुछ परिस्थितियों में राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना निर्णय ले सकता है। यहीं से विवाद उत्पन्न होते हैं।
- स्पष्ट बहुमत न होने पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति
- विधानसभा में शक्ति-परीक्षण का आदेश
- विधेयकों को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना
- अनुच्छेद 356 की रिपोर्ट भेजना
🔹 3. राज्य विधानसभा की शक्तियाँ
राज्य विधानसभा लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संस्था है और कानून-निर्माण की प्राथमिक शक्ति उसी के पास होती है।
- कानून बनाना एवं संशोधन
- बजट पारित करना
- कार्यपालिका पर नियंत्रण
🔹 4. वास्तविक टकराव के प्रमुख क्षेत्र
- विधेयकों पर सहमति देने में देरी
- सत्र बुलाने में अनावश्यक विलंब
- अध्यादेशों का बार-बार प्रयोग
- राजनीतिक तटस्थता पर प्रश्न
🔹 5. संवैधानिक नैतिकता बनाम राजनीतिक व्यावहारिकता
संविधान राज्यपाल से अपेक्षा करता है कि वह संवैधानिक नैतिकता के अनुसार कार्य करे, न कि राजनीतिक दबाव में।
उत्तर में शक्तियों और विवेकाधीन अधिकारों का अंतर स्पष्ट करें, उदाहरण जोड़ें और संघवाद के प्रभाव का विश्लेषण करें।
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