Labels

Saturday, 7 February 2026

 


 राज्यपाल बनाम राज्य विधानसभा

Page 2: शक्तियाँ, विवेकाधीन अधिकार एवं वास्तविक टकराव

UPSC GS-II • State PSC • Constitutional Focus


🔹 1. राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियाँ

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। उसकी शक्तियाँ मुख्यतः औपचारिक हैं और मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयोग की जाती हैं।

  • विधानसभा सत्र बुलाना, स्थगित करना और भंग करना
  • विधेयकों पर सहमति देना, लौटाना या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना
  • मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों की नियुक्ति
  • अध्यादेश जारी करना (अनुच्छेद 213)

🔹 2. विवेकाधीन अधिकार (Discretionary Powers)

कुछ परिस्थितियों में राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना निर्णय ले सकता है। यहीं से विवाद उत्पन्न होते हैं।

  • स्पष्ट बहुमत न होने पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति
  • विधानसभा में शक्ति-परीक्षण का आदेश
  • विधेयकों को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना
  • अनुच्छेद 356 की रिपोर्ट भेजना

🔹 3. राज्य विधानसभा की शक्तियाँ

राज्य विधानसभा लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संस्था है और कानून-निर्माण की प्राथमिक शक्ति उसी के पास होती है।

  • कानून बनाना एवं संशोधन
  • बजट पारित करना
  • कार्यपालिका पर नियंत्रण

🔹 4. वास्तविक टकराव के प्रमुख क्षेत्र

  • विधेयकों पर सहमति देने में देरी
  • सत्र बुलाने में अनावश्यक विलंब
  • अध्यादेशों का बार-बार प्रयोग
  • राजनीतिक तटस्थता पर प्रश्न

🔹 5. संवैधानिक नैतिकता बनाम राजनीतिक व्यावहारिकता

संविधान राज्यपाल से अपेक्षा करता है कि वह संवैधानिक नैतिकता के अनुसार कार्य करे, न कि राजनीतिक दबाव में।

🎯 Mains Tip:
उत्तर में शक्तियों और विवेकाधीन अधिकारों का अंतर स्पष्ट करें, उदाहरण जोड़ें और संघवाद के प्रभाव का विश्लेषण करें।

➡️ अगला पेज: Page 3 – राज्यपाल बनाम राष्ट्रपति / स्पीकर (संस्थागत तुलना)


© Shaktimatha Learning | Polity Special Topics (Hindi)

No comments:

Post a Comment

  Unlock All Courses & Resources → Shaktimatha Learning Master Hub  Read Full Series (All Languages) Telugu Page ...