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Saturday, 7 February 2026

 


 स्पीकर बनाम दलबदल विरोधी कानून

Page 2: स्पीकर की शक्तियाँ, विवेकाधिकार और न्यायिक दिशा-निर्देश

UPSC GS-II • Constitutional Bodies • Governance


🔹 1. स्पीकर की संवैधानिक शक्तियाँ

दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत स्पीकर/अध्यक्ष को यह अधिकार प्राप्त है कि वह यह तय करे कि कोई विधायक दलबदल का दोषी है या नहीं। यह शक्ति 10वीं अनुसूची से प्राप्त होती है।

  • दलबदल याचिका पर निर्णय
  • सदस्य की अयोग्यता घोषित करना
  • विधानसभा की सदस्यता समाप्त करना

🔹 2. विवेकाधिकार (Discretionary Power)

संविधान ने स्पीकर को न्यायिक समान (quasi-judicial) भूमिका दी है। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब यह विवेक राजनीतिक पक्षपात से प्रभावित होता है।

  • निर्णय में अत्यधिक देरी
  • सरकार बचाने या गिराने में भूमिका
  • सत्तारूढ़ दल के पक्ष में झुकाव

🔹 3. Kihoto Hollohan बनाम Zachillhu (1992)

इस ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दलबदल विरोधी कानून की वैधता को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि:

  • स्पीकर का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन होगा
  • स्पीकर संविधान से ऊपर नहीं है
  • निष्पक्षता आवश्यक है

🔹 4. हालिया सुप्रीम कोर्ट दिशा-निर्देश

हाल के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • दलबदल मामलों का निर्णय समय-सीमा में होना चाहिए
  • जानबूझकर देरी संवैधानिक उल्लंघन है
  • स्पीकर का पद तटस्थ रहना चाहिए
🎯 GS-II Answer Tip:
“Speaker is expected to act as a neutral constitutional authority, not as a party functionary.”

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