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Saturday, 14 February 2026

 

⚖ विशेष विषय 2: चुनौतियाँ एवं नैतिक प्रश्न (पेज 3)


 1️⃣ जीन संपादन से जुड़े नैतिक प्रश्न

CRISPR जैसी तकनीकें मानव जीन में परिवर्तन करने की क्षमता रखती हैं। यह तकनीक उपचार में सहायक हो सकती है, लेकिन इसके दुरुपयोग की संभावना भी है।

  • “डिज़ाइनर बेबी” की बहस
  • आनुवंशिक असमानता
  • दीर्घकालिक जैविक प्रभाव

 2️⃣ जैव सुरक्षा (Biosecurity) जोखिम

उन्नत जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान का गलत उपयोग समाज के लिए खतरा बन सकता है।

  • ड्यूल-यूज़ रिसर्च (Dual Use Research)
  • जैविक हथियारों की संभावना
  • प्रयोगशाला सुरक्षा चुनौतियाँ

💰 3️⃣ समानता और पहुँच की समस्या

उन्नत जैव प्रौद्योगिकी उपचार महंगे होते हैं, जिससे समाज के सभी वर्गों तक उनकी पहुँच सीमित हो सकती है।

  • ग्रामीण-शहरी अंतर
  • पेटेंट और दवा की कीमतें
  • स्वास्थ्य असमानता

 4️⃣ नियामक चुनौतियाँ

विज्ञान की प्रगति नीति-निर्माण से तेज गति से आगे बढ़ रही है।

  • वैश्विक स्तर पर समान नियमों का अभाव
  • नैतिक स्वीकृति में देरी
  • निगरानी तंत्र की कमजोरी

 समग्र विश्लेषण

जैव प्रौद्योगिकी मानवता के लिए वरदान हो सकती है, परंतु बिना नैतिक दिशा-निर्देश और मजबूत शासन के यह जोखिम भी उत्पन्न कर सकती है।


 Mains दृष्टिकोण:
GS-3 (विज्ञान), GS-4 (नैतिकता), आंतरिक सुरक्षा, निबंध

 Published by Shaktimatha Learning
Science, Ethics & Governance Series

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