दैनिक समसामयिकी – 4 मार्च 2026 पेज 3 – वैश्विक गठबंधन एवं शक्ति पुनर्संरेखन
1️⃣ यूरोप की रणनीतिक स्थिति
यूरोपीय देश यूक्रेन को समर्थन जारी रखते हुए रक्षा बजट में वृद्धि कर रहे हैं। ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव आंतरिक नीतियों को प्रभावित कर रहे हैं।
- ✔ रक्षा व्यय में वृद्धि
- ✔ ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण
- ✔ NATO के साथ मजबूत समन्वय
2️⃣ इंडो-पैसिफिक – 21वीं सदी का रणनीतिक केंद्र
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक शक्ति प्रतिस्पर्धा का मुख्य मंच बन चुका है। समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला नियंत्रण और तकनीकी वर्चस्व के लिए प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है।
- QUAD सहयोग
- चीन का समुद्री विस्तार
- भारत की संतुलनकारी भूमिका
- मुक्त नौवहन की चिंता
3️⃣ BRICS विस्तार और वैकल्पिक ब्लॉक
BRICS समूह पश्चिम-प्रधान वित्तीय संस्थाओं के विकल्प के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
- ✔ डॉलर निर्भरता कम करने की पहल
- ✔ न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका
- ✔ वैश्विक दक्षिण (Global South) का प्रतिनिधित्व
4️⃣ शक्ति संतुलन के नए रुझान
वर्तमान विश्व व्यवस्था शीत युद्ध जैसी द्विध्रुवीय नहीं है, बल्कि बहुध्रुवीय और जटिल साझेदारियों पर आधारित है।
- ✔ बहु-संरेखन (Multi-alignment) नीति
- ✔ क्षेत्रीय सुरक्षा समझौते
- ✔ प्रतिस्पर्धा के बावजूद आर्थिक परस्पर निर्भरता
रणनीतिक अवलोकन
विश्व व्यवस्था अब एकल शक्ति पर आधारित नहीं है। भारत जैसी उभरती शक्तियाँ संतुलनकारी भूमिका निभा रही हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आने वाले दशकों में वैश्विक राजनीति का केंद्र बना रहेगा।
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