विशेष विषय
जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शासन
Page 2 – अंतरराष्ट्रीय समझौते
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (UNFCCC)
- स्थापना वर्ष – 1992 (रियो अर्थ समिट)
- उद्देश्य – ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता को स्थिर करना।
- सभी सदस्य देशों की वार्षिक बैठक – COP (Conference of Parties)।
परीक्षा फोकस: COP बैठकों का महत्व और निर्णय।
क्योटो प्रोटोकॉल (1997)
- विकसित देशों पर बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती लक्ष्य।
- तीन प्रमुख तंत्र – CDM, JI और Emissions Trading।
- ‘साझी लेकिन विभेदित जिम्मेदारी’ (CBDR) सिद्धांत की पुष्टि।
विश्लेषण: विकासशील देशों पर बाध्यकारी लक्ष्य नहीं थे।
पेरिस समझौता (2015)
- वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से कम रखना।
- राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)।
- जलवायु वित्त और तकनीकी सहयोग।
महत्व: सभी देशों की भागीदारी और लचीलापन।
परीक्षा प्रश्न: पेरिस समझौते की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।
CBDR सिद्धांत
साझी लेकिन विभेदित जिम्मेदारी: सभी देश जलवायु परिवर्तन के समाधान में सहभागी हैं, लेकिन उनकी ऐतिहासिक जिम्मेदारी और विकास स्तर के आधार पर दायित्व अलग-अलग हैं।
विश्लेषण: विकसित बनाम विकासशील देशों के बीच बहस का केंद्र।
📘 त्वरित तुलना तालिका
- UNFCCC – रूपरेखा और वार्ता मंच
- क्योटो – विकसित देशों के बाध्यकारी लक्ष्य
- पेरिस – सभी देशों की स्वैच्छिक भागीदारी (NDC)
“वैश्विक समस्याओं का समाधान वैश्विक सहयोग से ही संभव है।”
Prepared by Shaktimatha Learning
वैश्विक दृष्टिकोण | नीति विश्लेषण | परीक्षा उत्कृष्टता
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